सिंगरौली जिले में 11 वर्षीय आदिवासी दिव्यांग बच्ची दिल कुमारी बैगा के घुटनों के बल चलते हुए सिर पर लकड़ी का गट्ठा ढोते वीडियो ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी। यह वीडियो छत्तीसगढ़ बॉर्डर के पास स्थित बारहपन गांव का है, जहां जन्म से ही दोनों पैरों से दिव्यांग दिल कुमारी तीसरी कक्षा में पढ़ रही है। उसकी मां उर्मिला बैगा की तीन अन्य संतानें हैं और दिव्यांगता के कारण देखभाल न कर पाने की वजह से नाना-नानी ने उसकी परवरिश की जिम्मेदारी संभाली है।
नाना राम ब्रिज ने भावुक होकर बताया, “हमने उसे कभी जंगल से लकड़ी लाने नहीं कहा। ठंड में आग की जरूरत महसूस कर शायद उसने खुद ही मदद करने की सोची और लकड़ी लेने निकल गई।” उन्होंने यह भी कहा कि पंचायत स्तर पर कई बार मदद की गुहार लगाई, लेकिन कोई ठोस सहायता नहीं मिली। गरीबी और लाचारी के बीच बच्ची पढ़ाई जारी रखे हुए है, लेकिन दिव्यांगता हर कदम को चुनौतीपूर्ण बना देती है। शुक्रवार को प्रशासन हरकत में आया।
बच्ची और परिजनों को जिला मुख्यालय बुलाया गया, जहां रेड क्रॉस सोसाइटी के माध्यम से दिल कुमारी को ट्राइसाइकिल प्रदान की गई ताकि उसकी दैनिक आवाजाही आसान हो सके।एडिशनल सीईओ जिला पंचायत आईबी डामोर ने बताया कि बच्ची का स्वास्थ्य परीक्षण कराया जा रहा है। दिव्यांगता को ध्यान में रखते हुए संभावित ऑपरेशन की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही, सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत उपलब्ध सभी सुविधाएं और सहायता उसे प्रदान की जाएगी।

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