Wednesday, 25 February 2026

Mauganj News : मऊगंज में खनन माफिया का काला साम्राज्य, एनजीटी के आदेश बेअसर, पहाड़ छलनी कर पत्थर की अवैध तस्करी

मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले में अवैध खनन का खेल अब खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है। हनुमना क्षेत्र के लोढ़ी सहित दर्जनों गांवों में सैकड़ों अवैध खदानों का विशाल नेटवर्क सक्रिय है, जहां पहाड़ों को भारी मशीनों से काटकर पत्थर की पटिया, चीप और ढोका का कारोबार खुलेआम चल रहा है। इन खदानों से निकाले गए पत्थर ट्रकों में भरकर उत्तर प्रदेश और बिहार तक भेजे जा रहे हैं, जिससे अंतरराज्यीय माफिया नेटवर्क की भूमिका सामने आ रही है।

स्थानीय ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों के अनुसार, पहाड़ों को इस कदर छलनी कर दिया गया है कि चारों ओर गहरी खाइयां, बड़े-बड़े गड्ढे और उजड़े जंगल नजर आ रहे हैं। पर्यावरणीय नियमों की खुली अनदेखी हो रही है, जबकि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के दिशा-निर्देशों का भी कोई असर नहीं दिख रहा। इस अवैध गतिविधि से सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है, लेकिन प्रशासन की कार्रवाई महज कागजी स्तर पर सिमटी हुई नजर आ रही है।
खनन माफिया इतने बेखौफ हो चुके हैं कि न उन्हें प्रशासन का डर है और न कानून का। ग्रामीणों में दहशत का माहौल है, जबकि वन विभाग और खनिज विभाग के अमले पर दबाव की बातें सामने आ रही हैं। स्थानीय लोग आरोप लगा रहे हैं कि विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के कारण कार्रवाई नहीं हो पा रही।
अधिवक्ता बीके माला ने इस गंभीर मुद्दे को लेकर मऊगंज कलेक्टर से लेकर रीवा संभाग आयुक्त तक शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में उन्होंने बड़े पैमाने पर बिना अनुमति पत्थर उत्खनन, राजस्व हानि और पर्यावरण क्षति के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि बार-बार शिकायतों के बावजूद ठोस कार्रवाई न होने से माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। अधिवक्ता माला ने तत्काल जांच, अवैध खदानों को बंद करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है।
प्रशासन ने अभी तक कोई ठोस बयान जारी नहीं किया है, लेकिन बढ़ते दबाव के बीच मामले की जांच शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है। स्थानीय लोग अब सवाल उठा रहे हैं कि आखिर कब तक खनन माफिया कानून से ऊपर बने रहेंगे और जिम्मेदार विभाग कब जागेंगे?

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