Saturday, 11 March 2023

108 कुंडीय गायत्री महायज्ञ शुरू, शहर में निकाली गई भव्य शोभायात्रा, डॉ. चिन्मय पंड्या ने दिया ये उद्बोधन


इंजीनियरिंग कॉलेज परिसर में 108 कुंडीय गायत्री महायज्ञ का आयोजन

108 Kundiya Gayatri Mahayagya begins: अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा विश्व कल्याण के लिए शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज रीवा प्रांगण में चार दिवसीय 108 कुंडीय गायत्री महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम की शुरुआत शुक्रवार को भव्य शोभायात्रा निकालकर की गई। इसके बाद मुख्य अतिथि संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या ने अपना विशेष उद्बोधन दिया। 

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इन मार्गों से निकली शोभायात्रा

शुक्रवार सुबह गायत्री शक्तिपीठ रीवा से सुबह 11 बजे से गायत्री महायज्ञ के लिए कलश यात्रा का शुभारंभ किया गया। कलश यात्रा गायत्री शक्तिपीठ से साईं मंदिर, प्रकाश चौराहा, अमहिया होते हुए सिरमौर चौराहा फिर यज्ञ स्थल इंजीनियरिंग कॉलेज प्रांगण में पहुंची। जहां पर गायत्री परिब्राजकों द्वारा विधिवत वेदमंत्रों के उच्चारण के साथ गायत्री महायज्ञ की शुरुआत की गई। इस दौरान पीले परिधान में कलश लिए हजारों महिलाएं साथ चल रही थीं। वहीं गायत्री परिवार के भक्तों ने हम बदलेंगे तो युग बदलेगा का नारा दिया। शोभायात्रा में सभी समाज के लोग शामिल हुए।  इस दौरान अखिल विश्व गायत्री परिवार के मुख्य ट्रस्टी उपेंद्र सिंह, सहायक ट्रस्टी प्रमोद सिंह, गायत्री शक्तिपीठ के व्यवस्थापक हेमराज शर्मा, जिला समन्वयक योगेंद्र सिंह, रमेश श्रीवास्तव, रामस्वरूप गुप्ता, अभिमन्यु सिंह, हरिश्चंद्र मिश्रा सहित अखिल विश्व गायत्री परिवार के कार्यकर्ता व्यवस्था बनाने में लगे रहे। व्यवस्थापक शर्मा ने बताया कि गायत्री महायज्ञ 13 मार्च तक चलेगा जिसमें उन्होंने शहर के लोगों से सहभागिता निभाने की अपील की है। 

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यह आलौकिक अवसर: डॉ.पंड्या

संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या ने कहा कि यह गायत्री महायज्ञ अत्यंत आलौकिक अवसर है। यह हमे यह याद दिलाने के लिए है कि मनुष्य से बढ़कर कोई देवता नहीं। यदि हमने अपने जीवन को सुधार लिया और अपने दृष्टिकोण को ठीक कर लिया तो संसार और समाज सुंदर बन जाएगा। भगवान ने भी कहा है कि मनुष्य से बढ़कर कोई बड़ी सौगात नहीं है। जरूरत है कि भगवत आराधना करते हुए हम भगवान के प्रतिनिधि के रूप में धरती पर अच्छा करें। जिसके लिए हमे मनुष्य का जन्म मिला है उस संभावना को हम सब साकार करें। क्योंकि जीवन का उद्देश्य चला जाए तो कुछ भी हाथ नहीं रहता। 

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