रीवा. चार दिन जेल की सलाखों के पीछे क्या गुजरे बलात्कार के आरोपी आरक्षक पुष्पेंद साकेत को अपनी बेवा मां की याद सताने लगी। मां की परविश का हवाला देने हुये मा. दशम अतिरिक्त सत्र न्यायालय में मा. न्यायाधीश संगीता मदान से जमानत दिये जाने की दरर्खास्त की। इतना ही नहीं साथ ही आवेदन में इस बात का भी भय दिखाया कि उसकी नौकरी चली जायेगी। बलात्कार के आरोपी की ओर से अधिवक्त राघवेंद्र शर्मा ने मा. न्यायाधीश संगीता मदान से जरिये आवेदन फरियाद की। जिसका अपर लोक अभियोजक सरिता सिंह सेंगर ने पुरजोर विरोध किया। अपर लोक अभियोजक ने न्यायालय से अपील करते हुये कहा कि पुलिस पर आम जनमानस की सुरक्षा का दायित्व होता है। और निलंबित आरक्षक पुष्पेंद्र साकेत ने तो एक महिला की आबरू लूटी जो महिला संबंधी संगीन अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसे अपराध में आरोपी को जमानत देने का कोई औचित्य ही नहीं बनता। अपर लोक अभियोजक ने न्यायालय को बताया कि आरोपी आरक्षक पुष्पेंद्र साकेत पिता स्व. रामशरण साकेत निवासी हाल पुलिस लाइन पीडि़त महिला को शादी का झांसा देकर 2019 से दैहिक शोषण कर रहा था।
इतना ही नहीं पीडि़ता को जब इस बात का एहसास हुआ कि आरोपी उसे धोखा दे रहा तो उसने दूरी बनाने का प्रयास किया। उस पर आरोपी ने वर्दी का रौब दिखाते हुये 5 सितबंर 22 की शाम जबरन फरियादिया की आबरू लूट ली। साथ ही इस प्रकरण में अभी पुलिस की ओर से विवेचना भी पूरी नहीं हुई और न ही न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया गया। शासन की ओर से पैरवी कर रही अपर लोक अभियोजक की ओर से प्रस्तुत तर्क पर सहमति जताते हुये मा. दशम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संगीता सुदाम ने दुष्कर्म के आरोपी निलंबित आरक्षक की ओर से प्रस्तुत जमानत आवेदन को निरस्त कर दिया।
गौरतलब है कि आरक्षक पुष्पेंद्र साकेत पिता की मृत्यु पर अनुकंपा नियुक्ति में पुलिस विभाग में नौकरी पाया था। वर्दी का रूआब इस कदर उस पर छा गया कि वह महिला संबंधी संगीन अपराध कर बैठा। पति से ठुराई हुई दो बच्चों की मां थाना लेकर अपने पति के विरूद्ध शिकायत करने आई थी। जिसे वह अपने झांसे में फंसा लिया और शादी का झांसा देकर उसका दैहिक शोषण करता रहा। शादी करने से इंकार किये जाने पर पीडि़ता न्याय के लिए थाना से लेकर पुलिस विभाग के आला अधिकारियों तक के दरवाजे खटखटाई। तब जाकर उसकी शिकायत पर महिला थाना रीवा में आरोपी आरक्षक के विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध कर गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी को न्यायालय में पेश कर केंद्रीय जेल रीवा भेज दिया गया। जहां उसे अब अपनी बेवा मां के परवरिश एवं नौकरी की चिंता सताने लगी और उसने अधिवक्ता के माध्यम से जमानत की याचिका मा. न्यायालय में लगाई जिसे निरस्त कर दिया गया है।
No comments
Post a Comment