गाजियाबाद। दिल्ली से सटे गाजियाबाद के हिंदी भवन में रविवार की शाम हिंदी भवन समिति के सहयोग से ड्रामाटर्जी आर्ट एंड कल्चर सोसायटी, नई दिल्ली और रीवा की प्रासंगिक संस्था द्वारा आलोक शुक्ला के नाटक "अजीब दास्तान" (एक अनकहा सच) की शानदार प्रस्तुति हुई। इस नाटक का लेखन और निर्देशन स्वयं आलोक शुक्ला ने किया, जो चार दशकों से रंगमंच की दुनिया में सक्रिय हैं। उल्लेखनीय है कि आलोक शुक्ला GBS रोग से पीड़ित होने के बावजूद अपनी रंगमंचीय यात्रा को बिना रुके जारी रखे हुए हैं।
75 मिनट के इस नाटक में मुंबई के दो तलाकशुदा दंपतियों के जटिल रिश्तों और उनके टीनएज बच्चे की ड्रग्स की लत में फंसने की कहानी को दर्शाया गया। नाटक की कहानी इतनी प्रभावशाली थी कि दर्शक शुरू से अंत तक इससे जुड़े रहे।कलाकारों का शानदार अभिनय
नाटक में सुरभि (नतेशा), प्रणय गुप्ता (मृदुल कुमार), मोनाली (कविता), अप्पू/आदित्य (निखिल कुमार), प्रदीप/अनुराग (टेकचंद), जानकी (निकिता), अटेंडेंट (अभ्यूदय मिश्रा) और सुरभि के पिता (आलोक शुक्ला) की भूमिकाओं में कलाकारों ने अपने अभिनय से दर्शकों का दिल जीता।संगीत और मंच सज्जा की जादुई प्रस्तुति
नाटक के पांच गीतों का गायन और बैकग्राउंड म्यूजिक अभ्यूदय मिश्रा ने दिया, जिसने प्रस्तुति को और प्रभावी बनाया। टेकचंद द्वारा डिजाइन किए गए दो घरों के मंच सेट को सुनील चौहान की प्रकाश व्यवस्था ने जीवंत किया। जटिल दृश्यों और संवादों के बीच स्पॉट लाइट का सटीक उपयोग नाटक को और जीवंत बनाता रहा।दर्शकों और आयोजकों की प्रशंसा
नाटक की गंभीर विषयवस्तु, सधे हुए अभिनय और निर्देशक की अद्भुत परिकल्पना को दर्शकों ने खूब सराहा। हिंदी भवन समिति के सचिव सुभाष गर्ग ने आलोक शुक्ला को बधाई देते हुए कहा कि हिंदी भवन का सभागार उनके लिए हमेशा खुला रहेगा।सहयोगी टीम
नाटक में सहयोगी निर्देशन साक्षी चौहान, परिधान व रूप सज्जा नीतू शुक्ला और विजय लक्ष्मी, निर्माण समन्वयक प्रताप सिंह और वागीश शर्मा, तथा प्रचार में विनय शर्मा और निखिल ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।यह नाटक न केवल रंगमंच प्रेमियों के लिए एक यादगार अनुभव रहा, बल्कि सामाजिक मुद्दों पर गहरी छाप छोड़ने में भी सफल रहा।
नाटक में सुरभि (नतेशा), प्रणय गुप्ता (मृदुल कुमार), मोनाली (कविता), अप्पू/आदित्य (निखिल कुमार), प्रदीप/अनुराग (टेकचंद), जानकी (निकिता), अटेंडेंट (अभ्यूदय मिश्रा) और सुरभि के पिता (आलोक शुक्ला) की भूमिकाओं में कलाकारों ने अपने अभिनय से दर्शकों का दिल जीता।संगीत और मंच सज्जा की जादुई प्रस्तुति
नाटक के पांच गीतों का गायन और बैकग्राउंड म्यूजिक अभ्यूदय मिश्रा ने दिया, जिसने प्रस्तुति को और प्रभावी बनाया। टेकचंद द्वारा डिजाइन किए गए दो घरों के मंच सेट को सुनील चौहान की प्रकाश व्यवस्था ने जीवंत किया। जटिल दृश्यों और संवादों के बीच स्पॉट लाइट का सटीक उपयोग नाटक को और जीवंत बनाता रहा।दर्शकों और आयोजकों की प्रशंसा
नाटक की गंभीर विषयवस्तु, सधे हुए अभिनय और निर्देशक की अद्भुत परिकल्पना को दर्शकों ने खूब सराहा। हिंदी भवन समिति के सचिव सुभाष गर्ग ने आलोक शुक्ला को बधाई देते हुए कहा कि हिंदी भवन का सभागार उनके लिए हमेशा खुला रहेगा।सहयोगी टीम
नाटक में सहयोगी निर्देशन साक्षी चौहान, परिधान व रूप सज्जा नीतू शुक्ला और विजय लक्ष्मी, निर्माण समन्वयक प्रताप सिंह और वागीश शर्मा, तथा प्रचार में विनय शर्मा और निखिल ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।यह नाटक न केवल रंगमंच प्रेमियों के लिए एक यादगार अनुभव रहा, बल्कि सामाजिक मुद्दों पर गहरी छाप छोड़ने में भी सफल रहा।
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