रीवा। रीवा पुलिस के दामन पर लगा दाग एक बार फिर गहरा गया है। आईजी के ऑपरेशन प्रहार 2.0 की चेतावनियों को हवा में उड़ाते हुए कोतवाली पुलिस ने जुआ फड़ पर दबिश के नाम पर कथित तौर पर लूटकांड को अंजाम दिया है। इस मामले में न सिर्फ लाखों की अवैध वसूली का आरोप लगा है, बल्कि यह भी खुलासा हुआ है कि पुलिस टीम अपने साथ एक हिस्ट्रीशीटर बदमाश जावेद केकड़ा को भी ले गई थी, जिसने भी कथित लूट में हिस्सा लिया। मामला खुलने पर हड़कंप मच गया और आनन-फानन में पुलिस अधीक्षक ने कोतवाली थाना प्रभारी लल्लन सिंह नेताम और एएसआई रामनिवास बागरी को निलंबित कर दिया है। हालांकि, आरोप है कि इस 'लूटकांड' में शामिल तीन अन्य पुलिस आरक्षकों को बचा लिया गया है, और पूरे मामले की जांच के नाम पर सिर्फ लीपापोती की जा रही है।
जुआ फड़ पर दबिश, लाखों की वसूली का आरोप
जानकारी के अनुसार, कोतवाली पुलिस ने एक जुआ फड़ पर दबिश दी थी, जहां लाखों का दांव लगा था और 11 जुआरी मौके पर थे। आरोप है कि पुलिस ने मौके से बड़ी रकम जब्त की, लेकिन इसकी जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को नहीं दी गई और सारा माल खुद ही डकारने की कोशिश की।
जुआरी बड़े घर के: सभी जुआरी बड़े रसूखदार बताए जा रहे हैं, जिन्होंने इज्जत बचाने के लिए पुलिस के सामने गिड़गिड़ाया।
थाने के बाहर से छोड़ा: पुलिस ने कथित तौर पर उनसे पूरी रकम तो ली ही, साथ ही उन्हें थाने के बाहर से छोड़ने के नाम पर और वसूली कर ली।
आरोप: जुआरियों के बयान में यह बात सामने आई है कि मौके से 2 लाख रुपए से अधिक की राशि जब्त की गई थी, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में बहुत कम राशि दिखाई गई।
हिस्ट्रीशीटर को साथ ले गई पुलिस, आईजी की क्लास
पुलिस की विश्वसनीयता पर सबसे बड़ा सवाल तब खड़ा हुआ जब यह उजागर हुआ कि कोतवाली पुलिस इस दबिश में हिस्ट्रीशीटर बदमाश जावेद केकड़ा को अपने साथ लेकर गई थी। हिस्ट्रीशीटर ने भी कथित तौर पर पुलिस के साथ मिलकर जुआरियों से लूटपाट की। यह मामला सामने आने के बाद आईजी रीवा ने तत्काल संज्ञान लिया और सीएसपी, प्रभारी एसपी और एडिशनल एसपी को तलब कर जमकर क्लास लगाई। आईजी ने पूरे मामले की जांच रिपोर्ट मांगी है।
जांच में लीपापोती का आरोप
इस 'लूटकांड' में कुल 7 लोग शामिल बताए जा रहे हैं, जिनमें 5 पुलिसकर्मी थे। सीएसपी द्वारा की गई जांच में पुलिसकर्मियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई, जिसके बाद दो को निलंबित किया गया।
सस्पेंड: कोतवाली थाना प्रभारी लल्लन सिंह नेताम और एएसआई रामनिवास बागरी।
बचाव: आरोप है कि लूट में शामिल तीन पुलिस आरक्षकों को बचा लिया गया है और उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
बयान: जांच के दौरान जुआरियों ने आधा सच बताया, लेकिन तब भी 2 लाख से ऊपर की राशि जब्त होने की बात पुख्ता हुई।
स्थानीय लोग और प्रबुद्ध वर्ग इस मामले में निलंबित करने की जगह एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं, जैसा कि सिवनी और इंदौर में इसी तरह के मामलों में हुआ था, ताकि रीवा पुलिस एक मिसाल पेश कर सके।

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