नरसिंहपुर: नरसिंहपुर के आनंद नगर निवासी ओसवाल परिवार की छोटी बेटी अनामिका और उनके पति दिनेश कांकरिया ने अपने दो बच्चों सहित सांसारिक जीवन का त्याग कर जैन संत बनने का अभूतपूर्व फैसला लिया है। यह परिवार लगभग 4-5 करोड़ रुपए की संपत्ति का त्याग कर गुजरात के प्रसिद्ध जैन तीर्थ पालिताना (भावनगर) में 16 जनवरी 2026 को दीक्षा ग्रहण करेगा। यह निर्णय भौतिक सुखों की क्षणभंगुरता के बजाय आत्मिक शांति और सत्य की प्राप्ति को सर्वोच्च लक्ष्य मानने की उनकी गहरी आध्यात्मिक चेतना को दर्शाता है।
पारिवारिक निर्णय और पृष्ठभूमि
दीक्षा ग्रहण: पेशे से बिजनेसमैन दिनेश कांकरिया, उनकी पत्नी अनामिका, पुत्र विधान (चार्टर्ड अकाउंटेंट के छात्र) और पुत्री हर्षिता दीक्षा लेंगे।
सफलता की नींव: परिवार महाराष्ट्र के धूलिया में रहता है, जहां करोड़ों की संपत्ति है। उनकी बड़ी बेटी ने तो 5 वर्ष पहले ही संन्यासी दीक्षा ले ली थी और अब वह साध्वी शाश्वत निधि के रूप में जानी जाती हैं।
बचपन की इच्छा: अनामिका के बड़े भाई अतुल ओसवाल बताते हैं कि अनामिका की साध्वी बनने की इच्छा बचपन से ही थी, जिसे अब पति, बच्चों और पूरे परिवार की सहमति से पूर्ण किया जा रहा है।
अनामिका का मत: अनामिका कांकरिया ने स्पष्ट किया कि यह किसी विशेष घटना का परिणाम नहीं, बल्कि दृढ़ इच्छाशक्ति और परिवार की साझा आध्यात्मिक चेतना का फल है। उन्होंने कहा, "हमने महसूस किया कि जीवन केवल भौतिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं है, बल्कि आत्मिक शांति और सत्य की प्राप्ति ही सर्वोच्च लक्ष्य है।"
भाई का भावुक विदाई
जैन संत बनने की रस्मों के तहत अनामिका अपने मायके नरसिंहपुर आई थीं। अपने तीन भाइयों की इकलौती बहन अनामिका को दूसरी बार विदा करने के बाद बड़े भाई अतुल ओसवाल भावुक हैं। वे कहते हैं कि पहली बार दुल्हन के रूप में और अब दूसरी बार बेटी के रूप में विदा करने का सौभाग्य उन्हें मिला है।
दीक्षा समारोह
अंतिम सांसारिक यात्रा: परिवार 15 जनवरी 2026 तक सभी नाते-रिश्तेदारों से मिलेगा।
पवित्र दीक्षा: 16 जनवरी 2026 को गुजरात के पालिताना तीर्थ में दीक्षा लेने के बाद यह परिवार समाज के लिए साध्वी और संत बन जाएगा।
यह ओसवाल परिवार का निर्णय समाज के लिए एक प्रेरणास्रोत है कि जीवन का वास्तविक मूल्य संपत्ति और सफलता में नहीं, बल्कि आध्यात्मिक विकास और आत्म-साक्षात्कार में निहित है।

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