अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में विधि विभाग की मान्यता नवीनीकरण ना होने से आज छात्र-छात्राओं का आक्रोश फूट पड़ा। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जिम्मेदारों को पद से इस्तीफा देने की मांग की। आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रबंधन की लापरवाही के चलते एलएलबी कर चुके छात्रों का अधिवक्ता के रूप में पंजीयन नहीं हो पा रहा है साथ ही विश्वविद्यालय के समस्त विधि छात्र सिविल जज जैसी अन्य सभी प्रतियोगी परीक्षा में भाग लेने से वंचित हो रहे हैं। उपरोक्त समस्याओं को लेकर बड़ी संख्या में विधि छात्र विश्वविद्यालय के बाहर प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए हंगामा किया और विधि विभाग को बीसीआई की मान्यता देने की मांग की है।
विश्वविद्यालय परिषर में आंदोलन कर रहे विधि छात्रों ने बताया कि भारतीय विधिक परिषद यानी बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया (BCI) द्वारा विश्वविद्यालय के विधि विभाग की मान्यता नवीनीकरण ना होने के कारण विधि छात्रों का पंजीयन अधिवक्ता के रूप में राज्य अधिवक्ता परिषद जबलपुर में नहीं हो पा रहा है। साथ ही विश्वविद्यालय के समस्त विधि छात्र सिविल जज जैसी अन्य सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के फार्म भरने से वंचित हो रहे हैं।
बताया गया है कि विश्वविद्यालय द्वारा बीसीआई को वर्ष 2007 से लेकर वर्ष 2016 तक की डिफॉल्ट राशि एवं देय शुल्क जमा करना शेष है जिसके कारण विश्वविद्यालय के विधि विभाग को बीसीआई की मान्यता से वंचित रखा गया है और विश्वविद्यालय प्रबंधन की इसी लापरवाही के चलते सैकड़ा भर से अधिक छात्र अधिवक्ता के रूप में पंजीयन कराने से वंचित हो रहे हैं।

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