सीधी जिले के सेमरिया थाना क्षेत्र के बरिगवां नंबर दो गांव में सड़क की कमी के कारण आदिवासी गर्भवती महिला प्रीति रावत को समय पर अस्पताल न पहुंचाया जा सका। एंबुलेंस गांव से दो किलोमीटर दूर मुख्य सड़क पर रुक गई, जिसके चलते परिजनों को खाट को डोली बनाकर रस्सी-बल्ली के सहारे प्रीति को ले जाना पड़ा। रास्ते में ही उनका प्रसव हो गया। बाद में मां और नवजात को सेमरिया अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां दोनों की हालत स्थिर है।
लगभग 70 लोगों की आबादी वाला यह गांव आजादी के 78 साल बाद भी पक्की सड़क से वंचित है। बरसात में एक छोटी नदी बच्चों की स्कूली शिक्षा में बाधा बनती है। सीएमएचओ डॉ. बबीता खरे ने कहा कि एंबुलेंस समय पर पहुंची थी, लेकिन सड़क न होने से गांव तक नहीं जा सकी। समाजसेवी प्रभात वर्मा ने इसे शर्मनाक बताते हुए कहा कि समय पर मदद न मिलती तो मां-नवजात की जान खतरे में पड़ सकती थी।
पहले भी इसी क्षेत्र में गर्भवती लीला साहू ने सड़क की मांग उठाई थी, जिसके बाद सांसद राजेश मिश्रा ने हेलीकॉप्टर भेजने का वादा किया था। लेकिन गांववासी आज भी खाट और कंधे के सहारे इलाज के लिए जूझ रहे हैं।
पहले भी इसी क्षेत्र में गर्भवती लीला साहू ने सड़क की मांग उठाई थी, जिसके बाद सांसद राजेश मिश्रा ने हेलीकॉप्टर भेजने का वादा किया था। लेकिन गांववासी आज भी खाट और कंधे के सहारे इलाज के लिए जूझ रहे हैं।

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