जबलपुर: मध्य प्रदेश के शासकीय स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों को अब अनिवार्य रूप से ई-अटेंडेंस (E-Attendance) दर्ज करनी होगी। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की इस नीति को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने याचिका को औचित्यहीन (Without merit) बताते हुए निरस्त कर दिया, जिसके बाद शासकीय स्कूलों के शिक्षकों के लिए ई-अटेंडेंस की व्यवस्था अब अनिवार्य रूप से लागू रहेगी।
हाई कोर्ट का स्पष्ट रुख: जवाबदेही जरूरी
राज्य सरकार ने शासकीय स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने और उनकी जवाबदेही (Accountability) तय करने के उद्देश्य से ई-अटेंडेंस को अनिवार्य किया था। शिक्षक संघों ने इस नीति का कड़ा विरोध करते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। कोर्ट की टिप्पणी: सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह नीति शिक्षकों की उपस्थिति और कार्य के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए लाई गई है। हाई कोर्ट के इस निर्णय से शिक्षक संघों के विरोध के बावजूद सरकार की यह व्यवस्था अब स्थायी रूप ले लेगी।
उपस्थिति में बड़ा अंतर: नियमित शिक्षक बनाम अतिथि शिक्षक
ई-अटेंडेंस के मौजूदा आँकड़े चौंकाने वाले हैं, जो इस नीति की आवश्यकता को दर्शाते हैं। नियमित शिक्षक: वर्तमान में, शासकीय शिक्षकों में से केवल 55% ही ई-अटेंडेंस दर्ज कर रहे हैं। अतिथि शिक्षक: वहीं, अतिथि शिक्षक 94% उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। यह बड़ा अंतर नियमित शिक्षकों की उपस्थिति में लापरवाही को उजागर करता है।
ई-अटेंडेंस न दर्ज करने पर कार्रवाई
ई-अटेंडेंस के प्रति शिक्षकों की उदासीनता पर हाल ही में लोक शिक्षण आयुक्त ने सख्ती दिखाई थी। हाल ही में, ई-अटेंडेंस दर्ज न करने पर संभाग के 135 प्रिंसिपलों को नोटिस जारी किए गए थे। हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद, अब ई-अटेंडेंस में लापरवाही बरतने वाले शिक्षकों और प्राचार्यों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई होने की संभावना बढ़ गई है।

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