रीवा। जिले भर में रबी सीजन में हुई बारिश के बाद किसानों ने बोनी (बुवाई) की तैयारी तेज कर दी है, जिससे DAP (डाई अमोनियम फॉस्फेट) खाद की माँग में अचानक भारी उछाल आया है। हालांकि, विपणन केंद्रों और सहकारी समितियों में खाद की भारी किल्लत होने से किसान बेहद परेशान हैं। सरकारी वितरण व्यवस्था चरमरा गई है, जिससे किसानों को मजबूरन निजी दुकानों का रुख करना पड़ रहा है, जहाँ उन्हें मनमानी कीमतों का सामना करना पड़ रहा है।
निजी दुकानों पर कालाबाजारी
सरकारी केंद्रों पर स्टॉक खत्म होने के कारण किसान निजी विक्रेताओं से खाद खरीदने को मजबूर हैं। निजी दुकानदार इस किल्लत का फायदा उठाकर कालाबाजारी कर रहे हैं। DAP खाद की निर्धारित सरकारी कीमत 1350 रुपये प्रति बोरी है। निजी दुकानदार एक बोरी DAP को 1600 रुपये तक में बेच रहे हैं, जो किसानों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाल रहा है।
स्टॉक की स्थिति और वितरण
जिले में DAP खाद की कुल उपलब्धता और वितरण की स्थिति इस प्रकार है:
| विवरण | मात्रा | वितरण प्रणाली |
| कुल उपलब्ध DAP | 1472 मीट्रिक टन | - |
| निजी विक्रेताओं हेतु | 50% | सीधे दुकानों के माध्यम से |
| समितियों/विपणन संघ हेतु | 50% | डबल लॉक सिस्टम के माध्यम से |
समितियों में स्टॉक लगभग खत्म हो चुका है, जिससे सरकारी केंद्रों पर लंबी कतारें लग रही हैं और किसानों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
मांग-आपूर्ति में अंतर, मची भगदड़
खाद की माँग (Demand) और आपूर्ति (Supply) के बीच भारी अंतर होने के कारण वितरण केंद्रों पर किसानों की अत्यधिक भीड़ जमा हो रही है, जिससे व्यवस्था चरमरा गई है। हाल ही में, मनगवां के किसान समृद्धि केंद्र में खाद लेने के लिए किसानों के बीच भगदड़ मचने की घटना भी सामने आई थी।
किसानों ने चिंता जताते हुए कहा है कि यदि उन्हें समय पर DAP खाद नहीं मिली, तो बोनी में और देरी होगी, जिसका सीधा असर फसल उत्पादन पर पड़ेगा।

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