रीवा, महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर शहर में भगवान भोलेनाथ की भव्य शिव बारात निकाली जाएगी। इस बार बारात का मुख्य आकर्षण 30 फीट यानी लगभग 9.1 मीटर लंबा और 551 किलोग्राम वजनी विशाल त्रिशूल होगा, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचने वाले हैं।
आयोजन समिति ने बारात का रूट चार्ट जारी कर दिया है। बारात महाशिवरात्रि के दिन सुबह 9 बजे बेऊज धर्मशाला से प्रस्थान करेगी और प्रमुख मार्गों से होते हुए पचमठा आश्रम पहुंचेगी। मार्ग में खजरा चौराहा, स्टेच्यू चौक, साई मंदिर, टक्कर चौराहा, रीत सेंटर, राठौर मोहल्ला, शिल्पी प्लाजा, ब्लॉक रोड, स्वागत भवन, प्रकाश चौक, सिरमौर चौक और फोर्ट रोड होते हुए एसके स्कूल के पास से श्रमकल्याण केंद्र के समीप स्थित पचमठा आश्रम में बारात समाप्त होगी।
बारात के मार्ग में कुल 108 स्थानों पर श्रद्धालुओं द्वारा पुष्पवर्षा और भव्य स्वागत किया जाएगा। बारात में धर्म ध्वजा, झांझ-मंजीरा, ढोल-नगाड़े, डमरू दल, बैंड, महाकाल की पालकी, 31 फीट का त्रिशूल, रुद्राक्ष की झांकी, काली माता, आदिशक्ति, केदारनाथ मंदिर, नरसिंह अवतार, राधा-कृष्ण रासलीला और शिव-पार्वती की सजीव झांकियां मुख्य आकर्षण रहेंगी। इसके अलावा विभिन्न लोकनृत्य, डांडिया, घूमर और अखाड़ा प्रदर्शन भी बारात की शोभा बढ़ाएंगे।
पचमठा आश्रम पहुंचने के बाद विधि-विधान से शिव-पार्वती विवाह संपन्न होगा। विवाह के पश्चात दोपहर 1 बजे से शाम 5 बजे तक भक्ति संगीत, सांस्कृतिक कार्यक्रम और विशाल भंडारे का आयोजन होगा। देशभर से आए कलाकार भजन संध्या में प्रस्तुति देंगे, जिसमें राजस्थानी घूमर, फोक डांस, कृष्ण लीला और पारंपरिक लोकनृत्य शामिल रहेंगे।
आयोजन समिति के अध्यक्ष मनीष गुप्ता ने शहरवासियों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर इस धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव को सफल बनाएं। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक होगा, बल्कि रीवा की सांस्कृतिक विरासत को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगा।
बारात के मार्ग में कुल 108 स्थानों पर श्रद्धालुओं द्वारा पुष्पवर्षा और भव्य स्वागत किया जाएगा। बारात में धर्म ध्वजा, झांझ-मंजीरा, ढोल-नगाड़े, डमरू दल, बैंड, महाकाल की पालकी, 31 फीट का त्रिशूल, रुद्राक्ष की झांकी, काली माता, आदिशक्ति, केदारनाथ मंदिर, नरसिंह अवतार, राधा-कृष्ण रासलीला और शिव-पार्वती की सजीव झांकियां मुख्य आकर्षण रहेंगी। इसके अलावा विभिन्न लोकनृत्य, डांडिया, घूमर और अखाड़ा प्रदर्शन भी बारात की शोभा बढ़ाएंगे।
पचमठा आश्रम पहुंचने के बाद विधि-विधान से शिव-पार्वती विवाह संपन्न होगा। विवाह के पश्चात दोपहर 1 बजे से शाम 5 बजे तक भक्ति संगीत, सांस्कृतिक कार्यक्रम और विशाल भंडारे का आयोजन होगा। देशभर से आए कलाकार भजन संध्या में प्रस्तुति देंगे, जिसमें राजस्थानी घूमर, फोक डांस, कृष्ण लीला और पारंपरिक लोकनृत्य शामिल रहेंगे।
आयोजन समिति के अध्यक्ष मनीष गुप्ता ने शहरवासियों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर इस धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव को सफल बनाएं। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक होगा, बल्कि रीवा की सांस्कृतिक विरासत को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगा।

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