महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर रीवा किला परिसर स्थित प्रसिद्ध महामृत्युंजय मंदिर में भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। मंदिर के पट रात 3 बजे खोल दिए गए थे और सुबह 4 बजे से ही श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचने लगे। किला परिसर के मुख्य द्वार से लंबी कतारें लगी रहीं, जहां श्रद्धालु धैर्यपूर्वक अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए। मंदिर परिसर में सुरक्षा और व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन तथा मंदिर समिति के स्वयंसेवक तैनात रहे।
मंदिर के मुख्य पुजारी वनस्पति प्रसाद त्रिपाठी ने बताया कि रीवा का यह प्राचीन महामृत्युंजय मंदिर विशेष धार्मिक महत्व रखता है। यहां विराजमान स्वयंभू महामृत्युंजय शिवलिंग पर जलाभिषेक करने से असाध्य रोगों से मुक्ति मिलती है और सावन माह में पूजा-अर्चना से अकाल मृत्यु का भय भी दूर हो जाता है। मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसका 1001 छिद्रों वाला अनोखा शिवलिंग है, जिसे विश्व में अपनी तरह का इकलौता माना जाता है। भगवान शिव को सहस्त्र नेत्रधारी मानने की आस्था के कारण यहां श्रद्धालुओं की विशेष भक्ति उमड़ती है। महाशिवरात्रि के अवसर पर शहर और जिले भर के अन्य शिव मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। मनकामेश्वर महादेव मंदिर सहित विभिन्न शिवालयों में सुबह से दर्शन, पूजा और भंडारे का सिलसिला जारी रहा।
शहर के प्राचीन शिव मंदिर में धर्म परिवार द्वारा ग्यारह हजार पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण कर भक्तों को आकर्षित किया। वहीं गल्लामंडी में आकर्षक शिव बारात की झांकियां निकाली गईं। सड़कों के किनारे-किनारे सजीं शिव की खूबसूरत झांकियां लोगों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनी रहीं।

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