शासन के लिये आबकारी विभाग धन कुबेर के रूप में देखा जाता है। जो एक जिले में ही रंगीन मिजाज पानी से करोड़ों रूपये का राजस्व लाभ पाती है। हद तो तब हो गई जब आबकारी अमले ने कबाड़ से भी शासन को लाखों रुपये का राजस्व लाभ दिला डाला। यह नजारा गुरुवार को कलेक्टे्रट भवन रीवा में देखा गया। जब तत्कालीन जिला आबकारी आयुक्त विक्रमदीप सांगर के प्रयासों से थानों में खड़ी कबाड़ की हालत में गाडिय़ों को राजसात कर निलामी के मुहाने पर खड़ा कर चलते बने और जिला आबकारी कार्यालय की कमान नवागत जिला आबकारी अधिकारी अनिल जैन की हाथों सौंप गये। तत्कालीन जिला सहायक आबकारी आयुक्त विक्रमदीप सांगर के सपने को साकार करते हुये नवागत जिला आबकारी अधिकारी ने कबाड़ वाहनों की नीलामी करवा कर शासन को 759000 रूपये के स्थान पर 193 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर 2221311 रूपये का लाभ दिलवाया।
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रीवा जिले से 44 प्रतिशत का राजस्व लाभ हुआ
गौरतलब है कि आबकारी एक्ट में पकड़ी गई 15 फोर व्हीलर एंव दो टू व्हीलर वाहनों को तत्कालीन जिला सहायक आबकारी आयुक्त विक्रमदीप सांगर के प्रयासों से नीलाम की ले लिए स्वीकृति हुई। जिसका निष्पादन प्रक्रिया गुरुवार के दिन कलेक्ट्रेट भवन में किया गया। जिला आबकारी अधिकारी अनिल जैन ने बताया कि 17 वाहनों में से दो वाहनों को छोड़ कर 15 वाहनों पर टेंडरदाताओं ने जमकर बोली लगाई। और शासन की निर्धारित राशि 759000 रूपये से बढ़ कर 22213111 रूपये की बोली लगाते हुये शासन को राजस्व लाभ दिया। इतना ही नहीं 131 टेंडर फार्म की बिक्री से शासन को 65500 सौ रूपये मिले। इस दौरान डिप्टी कलेक्टर संजीव जैन, सहायक आबकारी आयुक्त अनिल जैन, लोक निर्माण विभाग के एई शैलेंद्र सिंह एंव आबकारी अधिकारियों सहित टेंडर दाताओं से हाल खचाखच भरा रहा। गौरतलब है कि वर्ष 2021-22 में जिले की शराब दुकानों के निष्पादन पर तत्कालीन जिला सहायक आबकारी आयुक्त विक्रमदीप सांगर के कार्यकाल में शासन को निर्धारित राशि 265 करोड़ से बढ़कर 313 करोड़ रुपये का राजस्व लाभ मिला है। पिछले वर्ष की तुलना से यदि आंकलन किया जाये तो शासन को रीवा जिले से 44 प्रतिशत का राजस्व लाभ हुआ।

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