Rewa News: कलेक्टर कार्यालय में एक हजार रिश्वत लेते लोकायुक्त की टीम ने बाबू को चेंबर में ही रिश्वत लेते धर दबोचा

Wednesday, 16 October 2024

/ by BM Dwivedi

रीवा। कलेक्टर कार्यालय में रिश्वत लिए जाने का मामला एक बार फिर सामने आया है। भू-अर्जन अधिकारी शाखा में पदस्थ सहायक ग्रेड-३ कर्मचारी हीरामणि तिवारी को एक हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया है। यह कार्रवाई लोकायुक्त पुलिस इकाई रीवा द्वारा की गई है। दोपहर करीब १२ बजे जैसे ही लोकायुक्त की टीम ने भू-अर्जन शाखा में पहुंचकर बाबू को गिरफ्तार किया, वहां पर मौजूद अन्य कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। कई कर्मचारी अपनी सीट छोड़कर बाहर निकल गए। कार्रवाई की खबर मिलते ही पूरे परिसर में सनाका खिंच गया। पहले तीन-चार लोग ही लोकायुक्त की ओर से पहुंचे थे, देखते ही देखते करीब दर्जनभर की संख्या में लोग जमा हो गए और ट्रैप की कार्रवाई से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी की। इस बीच कलेक्टर कार्यालय का कामकाज प्रभावित हो रहा था, जिसकी वजह से लोकायुक्त की टीम आरोपी बाबू हीरामणि तिवारी को अपने साथ लोकायुक्त कार्यालय लेकर गई। जहां पर देर शाम तक कार्रवाई जारी रही। यह कार्रवाई डीएसपी प्रवीण सिंह परिहार के नेतृत्व में हुई, जिसमें अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे। 

मुआवजा दिलाने के बदले ली रिश्वत


कलेक्ट्रेट की भूअर्जन शाखा में शिकायतकर्ता सुनील पांडेय पिता स्व. श्यामसुंदर निवासी जोरौट(मनगवां) ने आवेदन दे रखा था। जिसमें वारिसाना भूमि के मुआवजा अवार्ड 2 लाख 62 हजार 997 रुपए का भुगतान करने के एवज में बाबू हीरामणि तिवारी ने रिश्वत की मांग की। इसके बाद भी वह लगातार गुमराह करता रहा। जिसके चलते आवेदक सुनील पांडेय ने लोकायुक्त एसपी से पूरा घटनाक्रम बताया। जहां से शिकायत का सत्यापन कराने के बाद टीम भेजी गई और कलेक्टेट में एक हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए बाबू को गिरफ्तार किया गया।

कलेक्टर के निर्देश के बाद भी रिश्वत की डिमांड

शिकायतकर्ता सुनील पांडेय ने बताया कि वर्ष २०१७ में नहर के लिए भूमि का अधिग्रहण हुआ था। पिता के नाम पर मुआवजा बना था लेकिन भुगतान नहीं हुआ। कोरोना काल में पिता की मौत के बाद माता के नाम पर भूमि का वारिसाना कराया और उसके मुआवजे के लिए भटकते रहे। बीते महीने जनसुनवाई में कलेक्टर को आवेदन दिया गया, जहां से उन्होंने भू-अर्जन अधिकारी को कार्रवाई का निर्देश देते हुए आवेदक को भेजा। जहां पर आरोपी बाबू ने रिश्वत की मांग कर दी और कहा कि इसमें कई लोगों को देना पड़ता है। उक्त प्रकरण आरोपी के पास 25 सितंबर 2024 से लंबित था, रिश्वत के लिए वह परेशान कर रहा था। 

1500 रुपए पहले ले चुका था

कलेक्टर द्वारा भूअर्जन शाखा में भेजे गए आवेदक से पहले ही कहा गया कि सामान्य प्रक्रिया में तीन महीने लगेंगे। रुपए देने पर काम जल्दी होगा। इसी के चलते 1500 रुपए पहली किस्त के रूप में ही बाबू ले चुका था। बाद में एक हजार की और डिमांड करने लगा, जिसकी शिकायत लोकायुक्त में की गई और एक हजार लेते पकड़ा गया। 


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