मऊगंज में भ्रष्टाचार की हदें पार: 40 मिनट के कार्यक्रम में 10 लाख खर्च, बिजली की दुकान से खरीदे गए नाश्ता-पानी और गद्दे

Wednesday, 23 July 2025

/ by BM Dwivedi



मध्य प्रदेश के नवगठित मऊगंज जिले में भ्रष्टाचार का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले की खैरा ग्राम पंचायत में जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत आयोजित 40 मिनट के एक कार्यक्रम में 10 लाख रुपये खर्च दिखाए गए, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस खर्च का जमीन पर कोई नामोनिशान नहीं है।

आरोप है कि इस कार्यक्रम के लिए नाश्ता, पानी, फल, मिठाई, गद्दे और चादर जैसी सभी सामग्रियां एक ही वेंडर, प्रदीप इंटरप्राइजेज से खरीदी गईं, जो कि बिजली का सामान बेचने वाली फर्म है। मऊगंज जनपद पंचायत की अध्यक्ष नीलम सिंह सहित अन्य सदस्यों ने इस मामले में कलेक्टर को लिखित शिकायत दी है, जिसमें कहा गया है कि कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को न तो पानी मिला और न ही कोई खाना, फिर भी लाखों रुपये के बिल बनाए गए।
जनपद अध्यक्ष नीलम सिंह ने बताया कि कार्यक्रम में करीब 150-200 लोग ही मौजूद थे, और व्यवस्था के नाम पर केवल कुर्सियां थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि 9.85 लाख रुपये के बिल बिना प्रशासनिक समिति की मंजूरी के पास किए गए, जो नियमों का उल्लंघन है। स्थानीय निवासी अरुण पटेल ने भी पुष्टि की कि कार्यक्रम में नाश्ता-पानी की कोई व्यवस्था नहीं थी, और गद्दे-चादर जैसे खर्चों का कोई सबूत नहीं मिला।
इस मामले में और गंभीर खुलासा तब हुआ, जब पंचायत के लेखापाल रेखा पाल ने आरोप लगाया कि जनपद पंचायत के सीईओ रामकुशल मिश्रा ने उनकी डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (डीएससी) और मोबाइल जबरन छीन लिया, जिसके जरिए यह फर्जीवाड़ा किया गया। लेखापाल की शिकायत पर जनपद अध्यक्ष ने सीईओ को डीएससी और मोबाइल वापस करने का पत्र भी जारी किया, जो अब वापस हो चुका है।
पंचायत दर्पण पोर्टल पर अपलोड नोटशीट से भी फर्जीवाड़े की पुष्टि होती है, जिसमें दिखाया गया कि कार्यक्रम के लिए 2.54 लाख रुपये स्वीकृत किए गए थे, लेकिन 7.45 लाख रुपये से अधिक का भुगतान किया गया, वह भी बिना जनपद पंचायत की बैठक या प्रस्ताव के।
जिला कलेक्टर अजय श्रीवास्तव ने इस मामले में जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि एक जांच समिति गठित की गई है, जिसमें ट्रेजरी ऑफिसर भी शामिल हैं। यदि आरोप सही पाए गए, तो सीईओ और लेखापाल सहित सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला मऊगंज जिले में भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों को उजागर करता है, जहां सरकारी योजनाओं के नाम पर जनता के पैसे का दुरुपयोग हो रहा है। अब सवाल यह है कि क्या यह सुनियोजित घोटाला है या प्रशासनिक लापरवाही? जांच के नतीजे इस मामले की दिशा तय करेंगे, लेकिन फिलहाल यह भ्रष्टाचार की परतें खुलने का संकेत दे रहा है।

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