मऊगंज। मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में 16 जुलाई की शाम से 17 जुलाई की शाम तक लगातार 24 घंटे हुई मूसलाधार बारिश ने मऊगंज जिले में भारी तबाही मचाई है। जिले भर में आई बाढ़ के कारण 60 से ज्यादा कच्चे मकान पूरी तरह धराशाई हो गए, जबकि एक प्रमुख सड़क का बड़ा हिस्सा बह गया, जिससे आवागमन पूरी तरह से ठप हो गया है। राहत और बचाव कार्य में जिला प्रशासन की टीमें जुट गई हैं।
बाढ़ से सबसे ज्यादा नुकसान ग्रामीण इलाकों में हुआ है। जिले के ढाबा तिवरियांग गांव में करीब 50 घर धराशाई हुए, वहीं मारो गांव में भी एक दर्जन से अधिक घरों को क्षति पहुँची है। इन कच्चे मकानों में रहने वाले लोगों का भारी नुकसान हुआ है। हालांकि, राहत की बात यह है कि बाढ़ के कारण किसी भी तरह की जनहानि की कोई सूचना नहीं है।
मऊगंज-कटरा मार्ग जलमग्न, निर्माण की खुली पोल
तेज बारिश और बाढ़ के कारण मऊगंज-कटरा-प्रयागराज का मुख्य मार्ग पानी के तेज बहाव में बह गया है, जिससे आवागमन पूरी तरह से बंद हो गया है। बताया जा रहा है कि इस मार्ग का निर्माण कुछ ही साल पहले हुआ था, लेकिन पहली ही बारिश में इसके बह जाने से निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठ गए हैं। फिलहाल सड़क की मरम्मत का कार्य शुरू कर दिया गया है।
राहत कार्य में जुटा प्रशासन
घरों के धराशाई होने की सूचना मिलने पर जिला प्रशासन की टीमें मौके पर पहुँची और प्रभावित लोगों को तत्काल सहायता पहुँचाई। जिला प्रशासन ने प्रत्येक पीड़ित परिवार को बर्तन खरीदने के लिए ₹5000 और 50 किलो अनाज का वितरण किया है। साथ ही घरों का सर्वे कराकर उचित मुआवजा राशि देने का भी आश्वासन दिया गया है। मारो गांव में प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालकर पास के स्कूल भवन में ठहराया गया है, जहाँ उनके खाने-पीने की व्यवस्था भी की गई है।
"यह बाढ़ लाई गई है"
क्षेत्र के स्थानीय नेता और अधिकारियों ने भी बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया। उन्होंने कई गाँवों जैसे ढाबा, खटखरी, पहाड़ी, मुदरिया, हरदहाई और टटहरा का भ्रमण कर स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह केवल बारिश की वजह से आई बाढ़ नहीं है, बल्कि यह "बाढ़ लाई गई है।" उन्होंने आरोप लगाया कि गलत जगहों पर बनाए गए डैम और दीवारों के कारण पानी का बहाव रुका, जिससे जलभराव की स्थिति निर्मित हुई। उन्होंने इसे प्रशासन की बड़ी लापरवाही बताते हुए इस पर तत्काल ध्यान देने की बात कही।

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