इंदौर में दूषित पेयजल से हुई मौतों की हालिया घटना के बाद रीवा शहर में भी पेयजल आपूर्ति की गुणवत्ता को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। इस क्रम में महापौर अजय मिश्रा ने सोमवार को पीएचई और सीवरेज विभाग के अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक के बाद पत्रकारों से चर्चा में महापौर ने सवीकार किया कि शहर के कई वार्डों में नलों से गंदा पानी आ रहा है। इस समस्या के तत्काल समाधान के लिए उन्होंने राज्य सरकार से 90 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि की मांग की है।
महापौर ने बताया कि शहरवासियों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए वे वर्ष 2007 से लगातार प्रयासरत हैं। वर्तमान में 2035 तक पूरे शहर में स्वच्छ पेयजल आपूर्ति करने की 192 करोड़ रुपये की परियोजना तैयार की गई है, जिसमें से अब तक केवल 133 करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए हैं। शेष राशि मिलने पर अप्रैल महीने तक शहर के अंतिम छोर तक साफ पानी पहुंचाने का लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा। समस्या की जड़ बताते हुए महापौर ने कहा कि कई मोहल्लों में सीवर लाइन, गैस पाइपलाइन और टेलीफोन कंपनियों की खुदाई से पेयजल पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई है। इसके लिए संबंधित कंपनियों से जुर्माना भी वसूला जा रहा है। कुछ क्षेत्रों में पहले से ही लापरवाही के कारण अन्य पाइपलाइनों को पेयजल लाइन के ऊपर डाल दिया गया था, जिससे लीकेज होने पर अस्थायी रूप से गंदा पानी की समस्या उत्पन्न हो रही है।
स्थायी समाधान के लिए अमृत 2.0 योजना के तहत 60 किलोमीटर जर्जर पाइपलाइन बदलने का प्रस्ताव तैयार किया गया है, लेकिन पर्याप्त धनराशि न मिलने से कार्य की गति और गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। गंदे पानी से किसी संभावित दुर्घटना के सवाल पर महापौर ने स्पष्ट कहा, “स्वच्छ पानी उपलब्ध कराना हमारी जिम्मेदारी है। यदि कोई दुर्घटना होती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी हमारी ही होगी।

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