रीवा, मध्य प्रदेश: होली के पावन पर्व पर जब पूरा प्रदेश रंगों और उल्लास में डूबा हुआ था, तब रीवा के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. एस.के. त्रिपाठी और उनकी टीम ने कर्तव्यनिष्ठा की एक अनूठी मिसाल पेश की। होली के अवकाश के बावजूद डॉ. त्रिपाठी ने एक गंभीर हृदय रोगी की जान बचाने के लिए तुरंत जटिल PCI (पर्क्यूटेनियस कोरोनरी इंटरवेंशन) प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
मरीज की कोरोनरी धमनियों में 'बाइफरकेशन ब्लॉकेज' की जटिल समस्या थी, जहां धमनी दो हिस्सों में बंटती है और ब्लॉकेज दोनों ब्रांच में फैली हुई थी। डॉ. त्रिपाठी ने अत्यंत चुनौतीपूर्ण मानी जाने वाली आधुनिक TAP तकनीक (T-stenting and Small Protrusion) का सफल प्रयोग करते हुए बंद धमनियों को खोला और मरीज को नया जीवन प्रदान किया। यह प्रक्रिया अस्पताल की हाई-टेक कैथ लैब में पूरी सटीकता और विशेषज्ञता के साथ संपन्न हुई।इस सफलता में कैथ लैब टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा। डॉ. त्रिपाठी के साथ टेक्निशियन जय नारायण मिश्रा, सुधांशु तिवारी, सुमन साहू, अमन मिश्रा, सत्यम, निकित, विजय और सोनाली ने अपनी पूरी कार्यक्षमता, समर्पण और टीमवर्क से इस जीवन-रक्षक प्रक्रिया को संभव बनाया।
डॉ. एस.के. त्रिपाठी ने इस उपलब्धि का श्रेय प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल जी के दूरदर्शी विजन और कुशल नेतृत्व को दिया। उन्होंने कहा, “माननीय उपमुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल जी के प्रयासों और स्वास्थ्य विभाग के मार्गदर्शन से ही रीवा अब विंध्य क्षेत्र के मरीजों के लिए बड़े महानगरों जैसी उन्नत चिकित्सा सुविधाओं का केंद्र बन चुका है। डीन डॉ. सुनील अग्रवाल और अधीक्षक डॉ. अक्षय श्रीवास्तव के प्रशासनिक सहयोग से श्याम शाह मेडिकल कॉलेज एवं सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में ऐसी जटिल प्रक्रियाएं संभव हो पा रही हैं। होली के दिन इस चुनौतीपूर्ण TAP प्रोसीजर को सफल बनाना हमारी पूरी टीम के लिए गर्व का विषय है।”
यह घटना न केवल चिकित्सा क्षेत्र में समर्पण और तकनीकी उत्कृष्टता की मिसाल है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि मध्य प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य सुधारों और रीवा को मेडिकल हब बनाने के प्रयास कितने प्रभावी साबित हो रहे हैं। होली के इस पावन अवसर पर अस्पताल ने न केवल रंग बिखेरे, बल्कि 'जीवन का रंग' भी मरीज के परिवार को लौटाया।

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