सेमरिया विधायक की बढ़ी मुश्किलें, एडीजे ने याचिका की खारिज, जानिए क्या है मामला

Saturday, 10 December 2022

/ by BM Dwivedi


रीवा। तत्कालीन जनपद पंचायत सीईओ सिरमौर पर हुये जानलेवा हमले में सेमरिया विधायक केपी त्रिपाठी की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं। एक ओर जहां पुलिस सम्मन तामिल करने के लिए घर का चौखट खटखटा रही वहीं दूसरी ओर हाईकोर्ट जबलपुर से लेकर एडीजे न्यायालय सिरमौर ने उनकी याचिका को ही निरस्त कर दिया। सिरमौर विधायक के लिए अब जबलपुर स्थित विशेष न्यायालय का ही दरवाजा खुला है। जहां सांसद और विधायक के प्रकरणों की सुनवाई होती है। अधिवक्ता राजेश सिंह ने बताया कि सेमरिया विधानसभा के भाजपा विधायक केपी त्रिपाठी ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा सुनवाई उपरांत जनपद पंचायत सीईओ कांड में  दोषी ठहराते हुये विधायक को न्यायालय में उपस्थित होने का सम्मन जारी किया गया था।

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हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया

न्यायालय ने विधायक सेमरिया का तत्कालीन जनपद पंचायत सीईओ सुरेश मिश्रा पर हुये जानलेवा मामले के अपराध क्रमांक 354/22 में विभिन्न धारा पर दोषी माना है। जिस पर पुर्न अवलोकन हेतु सेमरिया विधायक केपी त्रिपाठी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। विधायक राजेश सिंह बघेल ने बताया कि हाईकोर्ट ने उनकी याचिका निरस्त कर दी। तब जाकर सिरमौर स्थित अपर सत्र न्यायाधीश संतोष चौहान के न्यायालय में पुर्न अवलोकन के लिए याचिका दायर की। जिसका अधिवक्ता राजेश सिंह बघेल ने पुरजोर विरोध करते हुये मा. न्यायालय में तर्क प्रस्तुत किया। जिस पर विचार करते हुये मा. न्यायाधीश संतोष चौहान ने विधायक सेमरिया की याचिका का खारिज कर प्रकरण अभिलेखागार में भेजे जाने का फरमान सुना दिया। 

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जमकर गहमा-गहमी वायरल हुआ था वीडियो

गौरतलब है कि तत्कालीन जनपद सीईओ सुरेश मिश्रा और विधायक सेमरिया के बीच किसी बात को लेकर तकरार हो गया और दोनो के बीच जमकर गहमा-गहमी हुई। जिसकी आडियो भी वायरल हुई है। आडियो वायरल होने के साथ ही पुरवा फाल के पास विधायक के गुर्गो ने वाहन रोक कर जान लेवा हमला किया था। उक्त प्रकरण में पुलिस ने विधायक के गुर्गाे को तो आरोपी बनाया लेकिन हमला करवाने के आरोप में विधायक को पुलिस ने आरोपी नहीं बनाया। सीईओ सुरेश मिश्रा और उनके परिजनों ने पुलिस के आला अधिकारियों से फरियाद भी की लेकिन सत्ता के आगे पुलिस बौनी हो गई। न्याय पाने के लिए सीईओ सुरेश मिश्रा ने अधिवक्ता राजेश सिंह के माध्यम से न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। जिस पर सुनवाई करने के उपरांत प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट ने उक्त प्रकरण पर विधायक को दोषी मानते हुये न्यायालय में हाजिर होने के लिए सम्मन जारी कर दिया। अधिवक्ता राजेश सिंह ने बताया कि सेमरिया पुलिस ने सम्मन का जबाब देते हुये न्यायालय को बताया कि घर जाने पर विधायक नहीं मिले। वहां मौजूद लोगों ने बताया कि विधायक केपी त्रिपाठी भोपाल गये हुये हैं।


सेमरिया विधायक केपी त्रिपाठी अपने अधिवक्ता के माध्यम से प्रकरण में पुर्नअवलोकन के लिए मा. उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी,जो निरस्त हो गई। एडीजे न्यायालय सिरमौर में उसके बाद याचिका दायर की। जिसके विरोध में मेरे द्वारा न्यायालय में मा. के सामने तर्क प्रस्तुत किया गया। जिस पर विचार करते हुये माननीय न्यायाधीश ने विधायक सेमरिया की याचिका को निरस्त कर दिया। 

राजेश सिंह, अधिवक्त सिरमौर 

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