शहरवासियों को शहर एसपी के ओहदे का हुआ एहसास, असामाजिक तत्वों में बढ़ी दहशत, जनाए कैसे

Thursday, 8 December 2022

/ by BM Dwivedi

जनता के बीच बढ़ रहा पुलिस पर विश्वास, उपद्रवियों और लफंगो में बना भय

रीवा. शहर में सीएसपी का ओहदा आज नहीं दशकों से है। कई सीएसपी आये और चले गये। कुछ तुर्रम खां निकले तो कुछ माटी के महादेव। सीएसपी शिवेंद्र सिंह बघेल के तबादला के बाद तो ऐसा महसूस होने लगा था कि शहर में सीएसपी नाम का कोई पद ही नहीं है। वैसे तो कहने के लिए शहर में दो सीएसपी के पद है और दोनों को ही अलग-अलग थानों की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। लेकिन बीते कुछ सालों से मानों ऐसा लगता था कि शहर से सीएसपी पद ही विलुप्त हो गया। जनता की नजर में केवल थाना प्रभारी और एसपी ही रहे। लेकिन जब से सीएसपी शिवाली चतुर्वेदी ने शहर एसपी की कमान संभाली है तो शहरवासियों को एक बार फिर से एहसास हुआ कि पुलिस विभाग में सीएसपी नाम का भी कोई ओहदा होता है। दिनभर थाना प्रभारियों से उनके क्षेत्र में होने वाली हलचलों की जानकारी लेना और शाम होते ही टीम के साथ सीएसपी का निकला एक ओर जहां जनता के बीच पुलिस पर विश्वास जागता दिखाई दे रहा तो वहीं दूसरी ओर असमाजिक तत्वों के बीच शहर एसपी शिवाली के नाम की दहशत भी समाने लगी है। अब तो सड़क किनारे जाम टकराने वाले भी दूर तक नजर मारते है कि कहीं शहर एसपी का तूफान तो नही आ रहा है। इतना ही नहीं ठेलों के किनारे भीड़ लगा कर ठहाके लगाने वाले चेहरे भी कम नजर ही नजर आते है। टू व्हीलर में स्टंट मारने वाले लंफगे और स्वंय को शहर का बादशाह समझ कर बीच सड़क पर वाहन खड़ी करने वालों के दिलों में शहर एसपी की दहशत समां रही है।

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एय्याशी के अड्डों पर दबिश, होटल संचालकों की फूलने लगी सांसे

शहर में कई ऐसे होटल है जहां लड़कियां परोसी जाती है। कई ऐसे भी होटल हैं जो निजी स्वार्थ के लिए प्रेमी युगलों को समय बिताने के लिए कमरे उपलब्ध कराते हैं। एसपी नवनीत भसीन के नेतृत्व में एक-दो होटलों पर कार्रवाई भी हुई। लेकिन केवल सूचना मिलने पर पुलिस डोलते हुये होटलों तक पहुंची। जिस तरह से होटलों की सघन चेकिंग की जानी चाहिये वह अधिकार शायद रीवा की पुलिस भूल गई थी। परिणाम स्वरूप शहर के कई होटल एय्याशी के अड्डों के नाम पर शुमार हो गये। शहर एसपी शिवाली चतुर्वेदी के निशाने पर होटल आ गये। मंगलवार को जिस तरह से अचानक होटलों पर पहुंच कर दबिश दी और होटल संचालकों को समझाइश दी तो उनकी सांसे फूलने लगी। उनको इस बात का भय सताने लगा कि एय्याशी परोसने के बजाय कहीं वह सलाखों के पीछे न चले जाये। इतना ही नहीं शरीर बेचने वाली लड़कियों और प्रेमी युगलों के बीच भी शहर एसपी का खौफ सताने लगा।

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बीच सड़क से उठ गई गाड़ी, पहुंच गई थाने

रीवा में वाहन चालकों में एक अलग ही प्रचलन है। जहां मन किया वहीं गाड़ी कर दी और उतर का छू मंतर हो गये। चाहे वह बाइक चालक हो या फिर फोर व्हीलर के मालिक। सड़क को जैसे खरीद रखी हो। ऐसा नहीं है कि यातायात पुलिस ऐसे लोगो को नजर अंदाज करती हो। जैसे ही यातायात पुलिस चालानी कार्रवाही करने का प्रयास करती है तो वाहन स्वामी या तो नेताओं का फोन करवा कर पुलिस पर अपनी धौंस बना लेते है या फिर खुद ही यातायात पुलिस से उलझ जाते है। मजे की बात तो यह है कि शहर एसपी ऐसा मौका ही नहीं दे रही है। सड़क में वाहन खड़ा कर आवागन को बाधित करने वाले वाहनों को उठा कर वह सीधे थाना परिसर में खड़ा कर चालानी कार्रवाई करने में उतारू है और वाहन स्वामी मूकदर्शक की भूमिका पर नजर आ रहे।

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